अछान्दसकाव्यहिन्दी साहित्य

ज़िंदगी एक किरदार

जिंदगी ने एक किरदार दिया हैं ,
जो हमें बिना रुके निभाना हैं।

किरदार अच्छा हैं या बुरा यह नहीं पता हैं ,
कठपुतली बना के यहां भेजा जो गया हैं।

वह निर्देशक बनकर बैठा है,
ओर अभिनय हमें सिखा रहा है।

वो निर्देशन के लिए आर्डर करेगा ,
और हमें उसी वक्त अभिनय करना हैं ।

वो कैमेरा लेकर खड़ा हैं,
जब बोले तब हमें हंसना हैं।

वो हर एक बात पर गोर करेगा ,
उसे हमें बड़ी गहराई से निभाना हैं ।

कभी भी किसी वक्त कोई मोड़ लाता रहेगा ,
और हमें पूरी तरह से तैयार रहना हैं।

वो कहानियां अपनी तरीके से लिखेगा ,
गिर के तो कभी संभल के वही स्क्रिप्ट पे चलना है ।

कभी कभी वो आपको अपने वजूद के लिए वक्त देगा ,
बस उसे बारिकाई से देख कर आगे बढ़ना है ।

जब वो चाहेगा तब वो किरदार बदल भी सकता हैं,
क्योंकि ज़िंदगी हो या कहानी सबकुछ उस के ही हाथ में हैं।

– दिशा पटेल

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