कहानी एवं लेखहिन्दी साहित्य

नरसिंह चतुर्दशी

वैशाख मास शुक्लपक्ष की चतुर्दशी के दिन भगवान नरसिंह ने दैत्यों के राजा हिरण्यकश्यप का वध किया और इसी दिन से नरसिंह जयंती / नरसिंह चतुर्दशी मनाई जाती है। भगवान नरसिंह शौर्य का प्रतीक है। भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप के वध हेतु इस अवतार में आधा नर का और आधा सिंह का शरीर धारण किया था। आज भगवान नरसिंह के साथ माँ लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व होता है।

आज के दिन ही भगवान शिव ने भगवान नरसिंह को शांत करने के लिए शरभ अवतार लिया था।
पाकिस्तान के मुल्तान में आज भी प्रह्लाद से जुड़े मंदिर के भग्नावशेष मिलते है। यह वही मंदिर है जहाँ भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप का वध किया और प्रह्लाद ने वहाँ मंदिर बनाया जिसे प्रहलादपुरी के नाम से जाना गया।

पहले इस नगर का नाम कश्यपपूरा था जो कि मुग़लो के आक्रमण के बाद मुल्तान हो गया। भारत पाकिस्तान के बंटवारे के बाद मुल्तान के सभी हिन्दू भारत आ गए। 1992 में बाबरी मस्जिद के प्रकरण के बाद मुल्तान के मुस्लिम कट्टरपंथीओ ने इस मंदिर को बम से उड़ा दिया। मंदिर के बाबा महंत नारायणदास बत्रा मंदिरमें रखी भगवान नरसिंह की मूर्ति को लेकर भारत आ गए और हरिद्वार में उसे स्थापित किया।

सनातन धर्मकी काल गणना तिथि, वार, मुहूर्त को जानिए। पश्चिमी संस्कृति का अवश्य सम्मान करें लेकिन हमारी महान भारतीय संस्कृति को न भूलकर भारतीय होने की भूमिका अवश्य निभाए। अपने इतिहास को जानिए, उससे दूर न रहे। इतिहास = इति + ह +आस = ऐसा ही हुआ था। मेरे हर सनातनी भाई बंधुओ को नरसिंह चतुर्दशी की शुभकामनाएं।

संदर्भ – गुगल

केतव जोषी

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