कहानी एवं लेखहिन्दी साहित्य

पीपीइ कि ट वाला भतू (भतिूतिया कहानी)

सारा गाँव सोया हुआ था|लेकि न कुमार जग रहा था|वो बहुत समय सेअनि द्रा की बीमारी सेपीड़ि त था|गाँव में
वसै ेबि जली शाम को पांच बजेतक रहती थी, फि र अधं ेरा| घना शांति सेभरा अधं ेरा! गाँव के सभी लोग अपना सब
काम ख़तम करके आठ बजेतक सो जात|ेहर घर मेंदि या जलता और थोड़ी थोड़ी रोशनी रहती|
बारि श की ऋतुचल रही थी !शाम सेहवाए तज़े चल रही थी|ऐसेमेंसभी घर के दि येबझु रहेथे|गाँव के सभी घर में
दि येबझु गए और लोग इतनी गहरी नींद मेंथेकी इनको पता भी ना चला की दि येबझु गए! आश्चर्य की बात तो
यह थी कि इतनी आवाज़ के साथ हवा बह रही थी मानो जसै ेनरक की सबसेखखंु ार आत्मा का समहू एक ही स्वर
मेंअपनी डरावनी हसीं हस रहा हो फि र भी कोई नींद सेउठ नहीं रहा था| ऐसेमेंकुमार जग रहा था!
खि ड़की के पास बठै ा बठै ा अपनेटेलीस्कोप सेतारों को देख रहा था| जब बहुत रात वो परेशान हुआ तो उसनेसोचा
की ऐसा कोई उपाय नि काला जाए जि ससेउसकी परेशानी भी कम हो जाए और वक़्त का भी अच्छा इस्तमे ाल
हो|उसको खगोल वि द्या मेंबहुत रूचि थी |इसलि ए उसनेटेलीस्कोप ख़रीदा और हर रात ब्रह्माण्ड के अद्भतु
रहस्यो को देखनेलगा|चाँद पेबनेबड़ेबड़ेगड्ढों को देखता! उसमेकैसेउल्का गि री होंगी उसके बारेमेंसोचता|अगर
वो उल्काएंपथ्ृवी पर गि री हुई होती तो पथ्ृवी कैसी होत? पथ्ृवी पर कि तनेसमद्रु होत?े ज़मीन होती भी या नहीं
और अगर होती तो कि तनी? ऐसेअनेक सवाल हररोज़ उसके मन मेंआतेऔर उनको सोच के आखि र उसको नींद
आ जाती!

 

पवन चलतेकुमार के घर का दि या बझु गया! उसनेदि या फि र सेजलाया| जसै ेही दि येकी रोशनी हुई और वो
रोशनी खि ड़की के बाहर पड़ी तो उसनेदेखा की पीपीइ कि ट चल रही थी! पहलेतो वह डर गया! उसेलगा की इतनी
हवा चल रही हैशायद कहींसेपीपीई कि ट उड़ कर आरही हो|उसनेदि या फि र जलाया तो देखा वो कोई वहम नहीं
था|

 

पीपीई कि ट सच मेंचल रही थी और सरपचं के घर की ओर बढ़ रही थी| कुमार नेदेखा की वह बि ना दरवाज़ा खोले
सरपचं के घर मेंघसु ी! कुमारनेहि म्मत जतु ाई और वो भी अपनेघर के बाहर नि कला| सरपचं के घर की एक
खि ड़की खलु ी थी वहाँसेवह घर के अदं र गया|

 

एक कमरेसेसरपचं की जब चीखनेकी आवाज़ आयी तो कुमार उस कमरेकी ओर बढ़ा| सरपचं घर मेंअकेला ही
था|उसकी बीवी बच्चों को लेके मायके गयी हैऐसा उसनेसबको बोल रखा था|कुमारनेदेखा की वो पीपीई कि ट
सरपचं को घसीट रही थी और एक ख़फ़िुफ़िया कमरेकी ओर लेजा रही थी!

 

कुमार काफ़ी डर गया था लेकि न फि र भी उसनेहि म्मत की औऱ पीछेपीछेगया| उसेलगा कोई चोर डाकूहोंगेजो
सरपचं को मारनेआयेहोंगे! उसनेफि र सरपचं की जान बचानेकी सोची|

 

वो पीपीई कि ट नेकुहाड़ी उठाई औऱ सरपचं को मारनेही वाली थी की कुमार नेहवा की तरह आगेआके कुहाड़ी
पकड़ ली औऱ वो पीपीई कि ट को पीछेधकेलनेकी कोशि श की लेकि न वो उसको छूना पाया उसका हाथ उसके
आरपार हो गया! कुमार सोचनेलगा यह कैसेहो सकता है! इस बार उसनेसोचा मेंपीपीई कि ट को पकड़ लूउसको
हटा दूऔऱ उसका चेहरा देखल|ुजसै ेही उसनेउस पीपीई कि ट को खेंचा वो दंग रह गया! उसमेंसेएक आत्मा
नि कली! उसकी दोनों आखं ेनहीं थी औऱ दो कालेखाली गोलो सेज़हर नि कल रहा था! उसके मँहु पेपत्थर सेकुचले
जानेके नि शान थे! दाँत सभी टूटेहुए थे!नाक सेखनू बह रहा था! उसके सीनेसेदि ल नि काल लि या गया था! दोनों
परै रस्सी सेकसकर बधं ेथे!

 

बड़ी डरावनी आवाज़ मेंवो आत्मा रुडाली कर रही थी!कुमार तो पहचान ना सका लेकि न सरपचं पहचान गया!
‘रूपमती तमु ? ! तमु कैसेज़ि दं ा हो सकती हो? तम्ुहेंतो मनैं ेही मार दि या था!’

 

‘हा, मेरेशरीर को मार दि या था लेकि न मेरी आत्मा को नहीं! तमु सेबड़ा ईश्वर हैजि सनेमरनेके बाद भी मझु े
शक्ति दी की तम्ुहारेजसै ेभेड़ि येका वध कर सकँू! लोगो ऑक्सीजन की कमी सेमर रहेहै! लोगों के पास खाली
सि लेंडर भी नहीं है! उनके अपनेमर रहेहैऔऱ उनकी मदद करनेके बजाई तमु ऑक्सीजन सि लि डं र की
कालाबाज़ारी करतेहो| तमु नेइस कमरेमें50 सि लि डं र छुपा के रखेहैऔऱ बाक़ी के पांच या सात गनु ा दाम पेबेच
दि ए है! मनैं ेवि रोध कि या, पलिुलिस के पास जानेलगी तो तमु नेमेरा भी यह हाल कि या| मझु ेमारा! मझु ेपीता! मझु े
जान सेमारा! फि र मेरेचेहरेपेपत्थर मार के मेरा चेहरा बि गाड़ दि या! फि र मझु ेपीपीई कि ट मेंडाल के रात को जहां
सभी कोरोना सेमतृ हुए लोगों की लाशेंजल रही थी उस आग मेंजलनेके लि ए डाल दि या जि ससेकि सी को पता ना
चले|

 

कि तनेक्रूर औऱ नि ष्ठुर हो! फि र उसनेअपनेदोनों हाथो मेंसि लेंडर लि ए और उससेसरपचं को मारनेलगी| सरपचं
का सारा मँहु पि चक गया! मँहु औऱ खोपड़ी की सभी हड्डि या टूट गयी! दि माग़ बाहर आगया औऱ सरपचं की मत्ृयु
हो गयी!

 

कुमार नेसब देखा और भाग के अपनेघर वापस आया|
अगली सबु ह गाँव के लोग जब सरपचं के घर के पास सेगज़ु रेतो डर गए! सारा घर टूट गया था! सरपचं का मतृ ,
कुचला हुआ शरीर वहाँपड़ा हुआ था! पास मेंबहुत सारेऑक्सीजन सि लि डं र थेजि समेंदो पर खनू लगा हुआ था !
वहाँपास मेंएक पीपीई कि ट भी पड़ी हुई थी! कि सी को कुछ समझ नहींआ रहा था! उतनेमेंपलिुलिस,पलिुलिस स्टेशन
सेनि कल रही थी, कि सी नेउनको फरि याद लि खावाईथी की सरपचं ऑक्सीजन सि लि डं र की कालाबाज़ारी करता है!
पलिुलिस घटना स्थल पर पहुंची तो देखा जो फरि याद मि ली थी वो सच थी लेकि न जि नके खि लाफ वो मि ली थी उसका
खनू हो गया था! उन्होंनेसभी सि लेंडर ज़रूरत मदं ो को मोहय्या करवाए औऱ सरपचं के खनू की जाँच करनेलगे
लेकि न कुछ हाथ न लगा औऱ उन्होंनेजाँच बधं करदी!

 

सि वाय कुमार कि सी को नहींमालमू की उस रात क्या हुआ था! रूपमती को कुमार अपनी मांकी तरह समझता था!
इसलि ए रूपमती नेउसके सामनेबदला लि या जि ससेकुमार जान सके की उसके साथ क्या अन्याय हुआ था|कुमार
नेकि सी को बि ना बताए दसू रेशहर जाके रूपमती के लि ए पजू ा की जि ससेरूपमती की आत्मा को शांति मि ल गयी!

Burhan Kadiyani

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