काव्यहिन्दी साहित्य

एक छोटा सा बीज..

एक छोटा सा बीज.. 

उसे क्या करना है पता नहीं.. 

खिलना और बस खिलना.. 

सिर्फ महसूस होता है.. 

वह गर्मी और प्रकाश की ओर आकर्षित होता है..और तब.. 

प्रक्रिया बिना प्रयास के अपने आप सामने आ जाती है.. 

अगर हम इंसान के रूप में.. 

खुद को निर्देशित होने की अनुमति दे तो.. 

एक प्राकृतिक शक्ति से जो हमें भीतर से चलाती है.. 

तब हम भी बढ़ेंगे और खुद को विकसित करेंगे.. हमारे सर्वोच्च स्व में .. 

अपनी प्रक्रिया के निरंतर विश्वास के साथ।

मत भूलना.. 

हमेशा याद रखना.. 

बचपन में आप कैसे थे.. 

आप कैसे चकित थे.. 

आपको कैसा महसूस होता था.. 

इस सब ने आपको कैसे खुशी दी.. 

इसने आपको कैसे चमकाया ..।

अपने आसपास भय और अराजकता न आने दें.. अपनी जगमगाती आत्मा को मंद ना होने देना उसे खुले रहने दो .. 

छोटे चमत्कारों के लिए.. 

वह आपको जीवन भेजता है। 

~ बिजल जगड

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